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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

शान्तिपाठ

    असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः । उतैनं गोपाऽअदृशन्नदश्रन्नुदहार्यः स दृष्टो मृडयाति नः

    यह रूद्र सूर्य देव नीलग्रीवा तेजस्वी होने पर सूर्यमण्डल में नीलवर्ण दिखता है, तथा विशेष रक्तवर्ण युक्त होकर निरन्तर गतिमान् रहते हैं। इनके दर्शन

    उदयकाल में नित्य गोप गौ चराने वाले और जल ले जाने वाली नारियों करती हैं। ऐसे उन रुद्रदेव आदित्य के दर्शन हमारे लिए अत्यन्त कल्याणकारी हैं ॥ ७ ॥

    नमोऽस्तु नीलग्रीवाय सहस्राक्षाय मीढुषे। अथो ये अस्य सत्वानोऽहं तेभ्योऽकरं नमः

    नीले कण्ठ वाले (सूर्य-किरणरूप) सहल नेत्र वाले प्राण पर्जन्य की वर्षा करन, वाले रुद्रदेव(सूर्य) के लिए हमारा नमन हो, इनके जो सत्यरूप अंश (अनुचर) हैं, उनके लिए भी हम नमस्कार करते हैं ॥

    शं नो मित्रः शं वरुणः शं नो भवत्वर्यमा। शं न इन्द्रो बृहस्पतिः शं नो विष्णुरुरुक्रमः

    सहयोगी रूप मित्रदेव, श्रेष्ठ वरुणदेव.न्यायकारी अर्यमादेव, ऐश्वर्यवान् इन्द्रदेव, वाणी के स्वामी बृहस्पतिदेव तथा संसार का पालन करने वाले विष्णुदेव हम सबके लिए कल्याणकारी हो ॥

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